सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

तेरी झलक में Teri Jhalak Me

तेरी झलक में 



तेरी झलक में बसा है मेरा प्यार,
तेरे बिना हर दिन लगे बेकार।
तू ही है मेरी धड़कनों का एहसास,
तू ही है मेरे प्यार का वो खास।

तेरी नज़रें जब मुझ पर ठहरती हैं,
हर दर्द और ख़ुशी से मुझे आभरती हैं।
तू हो तो हर लम्हा हो जाता है सुनहरा,
तेरे बिना ये दिल है जैसे एक बिखरा।

तेरे साथ बिताए लम्हों की है बात अलग,
तेरे बिना ये दिल है जैसे एक चुप्पा संग।
तू हो तो दुनिया में हर रंग है छाया,
तेरे बिना हर चीज़ में बस तन्हाई है साया।

तेरी हंसी में बसी है मेरी जिंदगी की खुशी,
तेरे बिना हर दिन लगता है जैसे कोई तृष्णा की बशी।
तू ही है मेरे दिल का हर नज़ारा,
तेरे बिना ये जीवन है जैसे कोई उदास मंजर।

अब तुझमें है मेरी हर एक आस,
तेरे बिना ये दिल है बिल्कुल उदास।
तू ही है मेरे प्यार का सबसे बड़ा एहसास,
तेरी झलक में है मेरी खुशियों का साज।


This poem beautifully expresses the deep love and longing the speaker feels for their beloved, emphasizing how their presence brings meaning and joy to life, while their absence creates a sense of emptiness.

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

देश की मिट्टी (Desh ki Mitti) - Soil of the Nation

देश की मिट्टी (Desh ki Mitti) - Soil of the Nation पहला छंद: देश की मिट्टी, चंदन सी पावन, माथे पे लगाऊँ, बन जाऊँ मैं धावन। इसकी रक्षा में, जीवन अर्पण कर दूँ, भारत माँ की सेवा में, हर पल समर्पित रहूँ। दूसरा छंद: इस मिट्टी में जन्मे, वीर सपूत अनेक, जिनकी गाथा गाता, हर एक जन सेवक। भगत सिंह, गाँधी, नेहरू की यह धरती, त्याग और बलिदान की, अमर कहानी गढ़ती। तीसरा छंद: इस मिट्टी में खिले, रंग-बिरंगे फूल, भाईचारा, एकता का, अनुपम है मूल। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सब यहाँ, मिलजुल कर रहते, जैसे एक परिवार महान। चौथा छंद: देश की मिट्टी, मेरी माँ का आँचल, इसकी रक्षा में, मैं हूँ अटल। हर कण में बसा, देशप्रेम का भाव, भारत माँ की जय, यही मेरा है ठाव।

कुछ कमीने दोस्त Kuch Kamine Dost

 कुछ कमीने दोस्त कभी हंसते हैं, कभी रुलाते हैं,  कुछ क़ामिन दोस्त हमें यूं ही सताते हैं।  हंसी में छुपा एक राज़ है, जो  हर मस्ती में अपनी बात बताते हैं।  जब भी मुश्किलें आईं, साथ खड़े रहे,  फिर भी कभी-कभी दिल से हमें तंग करते रहे।  उनकी दोस्ती का ये अनोखा अंदाज़ है,  कभी प्यार से, कभी मजाक में हमें नचाते हैं।  कभी पास आते, कभी दूर हो जाते,  पर ये दोस्ती में कभी कमी नहीं लाते।  कुछ क़ामिन दोस्त हैं, पर दिल के करीब हैं,  उनके साथ बिताए लम्हे, हमेशा खास रहते हैं। -: नितिन कुमार :-

अजनबी सी रीत Ajnabi Si Reet

 अजनबी सी रीत हर रात जब आँखें बंद करता हूँ, तेरे साथ का सपना संजोता हूँ। तू ही है मेरा जीवन का संगीत, तेरे बिना दुनिया लगे अजनबी। तेरे सपनों में हर लम्हा सजा है, तेरे बिना दिल में एक खालीपन बसा है। तू हो तो रातें लगें रोशन सितारों से, तेरे बिना ये दिल भटकता है सवालों से। तेरी हंसी में बसती है मेरे दिल की खुशी, तेरे बिना ये जिंदगी लगती है एक बेबस कहानी। तू हो तो सब कुछ है मेरे पास, तेरे बिना हर पल है बेमानी और उदास। तेरे साथ बिताए लम्हों का है इंतज़ार, तेरे बिना ज़िन्दगी है जैसे कोई सूना विचार। तेरे बिना हर सपना अधूरा लगता, तेरे साथ हो तो दिल चैन से सोता। अब हर रात तेरे साथ का सपना है मेरा जहाँ, तेरे बिना कुछ भी नहीं है मेरी ज़िन्दगी का कारवां। तू ही है मेरे दिल की हर धड़कन का गीत, तेरे बिना ये दुनिया है बस एक अजनबी सी रीत। This poem reflects the longing and dreams of being with the beloved, portraying how their presence brings music and meaning to life, while without them, everything feels unfamiliar and empty