सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

तेरे प्यार का जादू Tere Pyaar Ka Jaadu

 तेरे प्यार का जादू



तेरे प्यार का जादू मुझ पर छा गया,
दिल मेरा बस तुझमें खो गया।
तेरे बिना हर पल सूना सा है,
तू ही मेरे प्यार की धड़कन है।

तेरी हर मुस्कान में है वो जादू,
जिसने मेरे दिल को अपना बना लिया काबू।
तू हो तो हर लम्हा हो जाता है खास,
तेरे बिना सब लगे एक वीरान आस।

तेरी आँखों में है वो चमक,
जो मेरी दुनिया को देती है नई दमक।
तू ही है मेरी दुनिया का हर रंग,
तेरे बिना ये दिल है बिल्कुल बेढंग।

तेरे प्यार ने मुझे दी है नई पहचान,
तू हो तो सब कुछ है, वरना सब सुनसान।
तू ही है मेरे जीवन का आधार,
तू ही है मेरी खुशियों का सच्चा संसार।

अब तेरे बिना नहीं कोई रास्ता,
तेरे प्यार में ही बसा है मेरा वास्ता।
तू ही है मेरे दिल की हर धड़कन,
तेरे प्यार का जादू मेरे जीवन का सजीव धन।


This version captures the magic and transformative power of love, highlighting how the beloved's presence fills life with joy and meaning, while their absence leaves everything empty and incomplete.

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कुछ कमीने दोस्त Kuch Kamine Dost

 कुछ कमीने दोस्त कभी हंसते हैं, कभी रुलाते हैं,  कुछ क़ामिन दोस्त हमें यूं ही सताते हैं।  हंसी में छुपा एक राज़ है, जो  हर मस्ती में अपनी बात बताते हैं।  जब भी मुश्किलें आईं, साथ खड़े रहे,  फिर भी कभी-कभी दिल से हमें तंग करते रहे।  उनकी दोस्ती का ये अनोखा अंदाज़ है,  कभी प्यार से, कभी मजाक में हमें नचाते हैं।  कभी पास आते, कभी दूर हो जाते,  पर ये दोस्ती में कभी कमी नहीं लाते।  कुछ क़ामिन दोस्त हैं, पर दिल के करीब हैं,  उनके साथ बिताए लम्हे, हमेशा खास रहते हैं। -: नितिन कुमार :-

देश की मिट्टी (Desh ki Mitti) - Soil of the Nation

देश की मिट्टी (Desh ki Mitti) - Soil of the Nation पहला छंद: देश की मिट्टी, चंदन सी पावन, माथे पे लगाऊँ, बन जाऊँ मैं धावन। इसकी रक्षा में, जीवन अर्पण कर दूँ, भारत माँ की सेवा में, हर पल समर्पित रहूँ। दूसरा छंद: इस मिट्टी में जन्मे, वीर सपूत अनेक, जिनकी गाथा गाता, हर एक जन सेवक। भगत सिंह, गाँधी, नेहरू की यह धरती, त्याग और बलिदान की, अमर कहानी गढ़ती। तीसरा छंद: इस मिट्टी में खिले, रंग-बिरंगे फूल, भाईचारा, एकता का, अनुपम है मूल। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सब यहाँ, मिलजुल कर रहते, जैसे एक परिवार महान। चौथा छंद: देश की मिट्टी, मेरी माँ का आँचल, इसकी रक्षा में, मैं हूँ अटल। हर कण में बसा, देशप्रेम का भाव, भारत माँ की जय, यही मेरा है ठाव।

मन उंच उंच उडे आकाशी - Man Unch Unch Ude Aakashi

मन उंच उडे आकाशी मन उंच उडे आकाशी बोट लावुनिये नभाशी मी आहे अजुनी धर्तीवर मना तू आता काहीतरी कर. बघ इथे फक्त स्वप्नांची नगरी राख होते सकाळी सगळी उजे ड  इथे इमारतीतच येतो गरीब इथे रोजच मरतो. फुलांचा इथे गंध नसतो मातीलाही इथे रंग नसतो मोलभाव होतो इथे इमानाचा खून होतो इथे नात्याचा जा कुठेतरी उडत जा जिथे असेल माणुसकी नात्या पलिकडचे नाते असेल असेल तिथे जाणीवकी -: नितिन कुमार :-